माँ भारती "माँ भारती "उतरी हिमालय विजयीदक्षिणी सिंधु साहसीशत्रु खड़ा बाहरीमाँ भारती पुकारतीबनो तुम वज्र सीजलो तो आग सीरुको नहीं, थको नहींविजयी हो विजयी बनोफुफकार भरो नाग सीजयघोष करो माँ भारतकाल बनों, बनो दावानल आग सीतुम भारत के वीर होरुको ना शूर साहसी कवि :-महेंद्र सिंह.
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